CBSE Class 7 Hindi

माँ, कह एक कहानी (कविता)

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पाठ सारांश, कवि परिचय एवं कठिन शब्दार्थ

माँ, कह एक कहानी (कविता)

कवि परिचय

{{VISUAL: photo: एक माँ और उसका छोटा बेटा घर के आँगन में साथ बैठे हुए, जहाँ माँ बच्चे को कहानी सुना रही है}}

शिवमंगल सिंह 'सुमन' हिंदी साहित्य के एक प्रतिष्ठित कवि और साहित्यकार थे। इनका जन्म 23 अगस्त 1915 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के झगरपुर नामक गाँव में हुआ था। इन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की और वहीं से अध्यापन कार्य भी किया।

{{KEY: type=definition | title=शिवमंगल सिंह 'सुमन' की रचनाधर्मिता | text=सुमन जी की कविताओं में राष्ट्रीय भावना, सामाजिक चेतना, मातृप्रेम और मानवीय संवेदनाओं का अद्भुत समन्वय मिलता है। उनकी भाषा सरल, प्रवाहमय और भावपूर्ण होती है।}}

प्रमुख रचनाएँ

शिवमंगल सिंह 'सुमन' ने हिंदी साहित्य को अनेक उत्कृष्ट रचनाएँ दी हैं। इनकी प्रमुख काव्य-कृतियाँ निम्नलिखित हैं:

  • हिल्लोल – इनका प्रथम काव्य संग्रह (1939)
  • जीवन के गान – प्रगतिशील भावनाओं से ओतप्रोत
  • युगवाणी – राष्ट्रीय चेतना से परिपूर्ण
  • विश्वास बढ़ता ही गया – आस्था और विश्वास पर आधारित
  • मिट्टी की बारात – लोक जीवन से जुड़ी कविताएँ
  • वाणी की व्यथा – मानवीय संवेदनाओं का चित्रण

इन्हें पद्म श्री, साहित्य अकादमी पुरस्कार, देव पुरस्कार और सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार जैसे अनेक सम्मानों से सम्मानित किया गया। इनका निधन 27 नवंबर 2002 को हुआ।

{{KEY: type=concept | title=सुमन जी की काव्य विशेषताएँ | text=सुमन जी की कविताओं में छायावाद, प्रगतिवाद और राष्ट्रीय चेतना का सुंदर मिश्रण मिलता है। उनकी भाषा शुद्ध हिंदी होते हुए भी सहज और सरल है। उन्होंने लोक जीवन, प्रकृति और मानवीय भावनाओं को अपनी कविताओं में स्थान दिया है।}}


पाठ का सारांश

'माँ, कह एक कहानी' एक मार्मिक कविता है जो माँ और उसके छोटे बच्चे के बीच संवाद के रूप में प्रस्तुत की गई है। इस कविता में मातृप्रेम, बचपन की जिज्ञासा और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास तीनों का अद्भुत संयोजन है।

कविता का प्रसंग

कविता का आरंभ एक छोटे बच्चे के मासूम अनुरोध से होता है। बच्चा अपनी माँ से कहानी सुनने की जिद करता है। माँ उसे सोने के लिए कहती है, लेकिन बच्चे की जिज्ञासा शांत नहीं होती। वह बार-बार माँ से कहानी सुनाने का आग्रह करता है।

{{KEY: type=points | title=कविता के मुख्य तत्व | text=- माँ और बच्चे के बीच संवाद शैली

  • बच्चे की मासूम जिज्ञासा और जिद
  • राष्ट्रीय चेतना का समावेश
  • झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का प्रसंग
  • मातृत्व की ममता और करुणा}}

माँ अपने बच्चे को झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की कहानी सुनाती है। वह बताती है कि किस प्रकार रानी लक्ष्मीबाई ने अंग्रेजों के विरुद्ध युद्ध किया और अपने बेटे को पीठ पर बाँधकर युद्ध करती रही। यह कहानी केवल मनोरंजन के लिए नहीं है, बल्कि इसमें देशभक्ति, वीरता, त्याग और मातृशक्ति का संदेश निहित है।

कविता का भावपक्ष

कविता में माँ का चरित्र अत्यंत स्नेहमय और शिक्षाप्रद है। वह अपने बच्चे को केवल कहानी नहीं सुनाती, बल्कि उसके माध्यम से राष्ट्रप्रेम और साहस का पाठ पढ़ाती है। बच्चे की जिज्ञासा और माँ का धैर्यपूर्ण उत्तर दोनों ही हृदयस्पर्शी हैं।

कविता यह भी दर्शाती है कि बचपन में सुनी गई कहानियाँ व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। झाँसी की रानी जैसे ऐतिहासिक पात्रों की कहानियाँ बच्चों में देशप्रेम और वीरता के संस्कार जागृत करती हैं।

{{KEY: type=exam | title=परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न | text=इस कविता से संवाद शैली, माँ-बच्चे के संबंध, रानी लक्ष्मीबाई के साहस और कविता का केंद्रीय भाव पूछा जाता है। भावार्थ और केंद्रीय संदेश पर विशेष ध्यान दें।}}


पाठ का केंद्रीय भाव

यह कविता तीन स्तरों पर काम करती है:

1. व्यक्तिगत स्तर

माँ और बच्चे के बीच का प्रेम और विश्वास प्रदर्शित होता है। माँ अपने बच्चे की जिज्ञासा को शांत करने के लिए धैर्यपूर्वक कहानी सुनाती है। यह मातृत्व की महानता का प्रतीक है।

2. सामाजिक स्तर

कविता यह दर्शाती है कि परिवार में बच्चों को नैतिक और सांस्कृतिक शिक्षा देने की परंपरा कितनी महत्वपूर्ण है। माँ अपने बच्चे को इतिहास और मूल्यों से परिचित कराती है।

3. राष्ट्रीय स्तर

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरता की कहानी के माध्यम से कवि राष्ट्रीय चेतना को जागृत करना चाहता है। यह कहानी बच्चों में देशभक्ति का भाव भरती है।

{{ZOOM: title=ऐतिहासिक संदर्भ | text=1857 की क्रांति में झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अद्भुत वीरता दिखाई थी। वे अपने दत्तक पुत्र दामोदर राव को पीठ पर बाँधकर युद्ध करती थीं। यह घटना भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।}}

माँ की कहानी केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि बच्चे के चरित्र निर्माण का माध्यम है।


कविता की भाषा और शैली

शिवमंगल सिंह 'सुमन' ने इस कविता में अत्यंत सरल और सहज भाषा का प्रयोग किया है। भाषा इतनी सरल है कि छोटे बच्चे भी इसे समझ सकते हैं। संवाद शैली के कारण कविता अधिक जीवंत और रोचक बन गई है।

भाषागत विशेषताएँ

  • खड़ी बोली हिंदी का प्रयोग
  • सरल और छोटे वाक्य जो बच्चों की भाषा के अनुकूल हैं
  • पुनरुक्ति का प्रयोग (बच्चा बार-बार कहानी माँगता है)
  • संवाद शैली जो कविता को नाटकीयता प्रदान करती है
  • भावात्मक शब्दावली जो हृदय को स्पर्श करती है

इस कविता में लय और गेयता है जो इसे पढ़ने और सुनने में आनंददायक बनाती है। कवि ने बच्चों की मनोदशा को बखूबी समझा है और उसी के अनुरूप भाषा का चयन किया है।

{{KEY: type=concept | title=कविता का शिल्प | text=संवाद शैली में रचित यह कविता बालमन की जिज्ञासा और माँ की ममता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करती है। सरल भाषा, लयात्मकता और ऐतिहासिक प्रसंग का समावेश इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं।}}


अगले पृष्ठ में: कठिन शब्दार्थ, पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ और व्याख्या


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भावार्थ एवं विस्तृत व्याख्या

भावार्थ एवं विस्तृत व्याख्या

"माँ, कह एक कहानी" कविता में प्रख्यात कवि शमशेर बहादुर सिंह ने एक बालक की जिज्ञासा और माँ के स्नेहमय उत्तर के माध्यम से ऐतिहासिक वीरता की गाथा प्रस्तुत की है। यह कविता माँ-बेटे के संवाद शैली में लिखी गई है, जिसमें बच्चे की भोली जिज्ञासा और माँ का धैर्यपूर्ण उत्तर दोनों ही मातृत्व की गहराई को दर्शाते हैं।

{{VISUAL: photo: रात के समय माँ अपने बच्चे को गोद में लेकर कहानी सुना रही है}}


पहली पंक्तियों का भावार्थ

"माँ, कह एक कहानी।"

बच्चा अपनी माँ से कहानी सुनाने का आग्रह करता है। यह पंक्ति बचपन की सहज जिज्ञासा और माँ के प्रति विश्वास को प्रकट करती है। बच्चे के लिए माँ केवल देखभाल करने वाली नहीं, बल्कि ज्ञान का स्रोत भी है।

{{KEY: type=concept | title=संवाद शैली का प्रयोग | text=इस कविता में प्रश्न-उत्तर शैली का प्रयोग किया गया है जो कविता को सजीव और आकर्षक बनाता है। यह शैली पाठक को सीधे घटना से जोड़ती है।}}

"एक राजा था, एक रानी थी..."

माँ पारंपरिक कहानी शैली में कहानी शुरू करती है। भारतीय लोककथाओं की यह परंपरागत शुरुआत हमें पीढ़ियों पुरानी कथा-परंपरा की याद दिलाती है। माँ अपने बच्चे को इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास करती है।


मध्य पंक्तियों का भावार्थ

"दोनों मर गए, खत्म कहानी!"

बच्चे का यह कथन उसकी अधीरता और पहले सुनी हुई साधारण कहानियों से ऊब को दर्शाता है। वह माँ से कुछ नया, कुछ अलग सुनना चाहता है। यह पंक्ति बाल-मनोविज्ञान को बखूबी प्रस्तुत करती है - बच्चे सामान्य घिसी-पिटी कहानियों से जल्दी ऊब जाते हैं।

{{KEY: type=definition | title=बाल-सुलभ जिज्ञासा | text=बच्चों में स्वाभाविक रूप से नई चीज़ें जानने की इच्छा होती है। वे पुरानी और दोहराई गई बातों से जल्दी ऊब जाते हैं और कुछ रोचक व नया सुनना चाहते हैं।}}

"माँ, तू मुझे एक और बतला..."

बच्चा निराश नहीं होता। वह पुनः माँ से नई कहानी की मांग करता है। इसमें आशा और विश्वास दोनों झलकते हैं - बच्चे को पता है कि माँ के पास और भी कहानियाँ हैं।


ऐतिहासिक प्रसंग का भावार्थ

माँ द्वारा सुनाई गई वीरता की कथा:

माँ अब एक ऐतिहासिक घटना सुनाती है - वह घटना जो साहस, बलिदान और देशभक्ति से भरी है। यह कहानी काल्पनिक राजा-रानी की नहीं, बल्कि वास्तविक वीरों की है जिन्होंने अपने देश और सम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

{{KEY: type=points | title=कविता के केन्द्रीय तत्व | text=- माँ-बेटे के बीच स्नेहपूर्ण संवाद

  • बचपन की स्वाभाविक जिज्ञासा
  • ऐतिहासिक वीरता की गाथा
  • माँ द्वारा संस्कार और मूल्यों का संचार
  • देशभक्ति और बलिदान का संदेश}}

कहानी में वर्णित घटना: माँ बताती है कि कैसे वीर योद्धाओं ने शत्रुओं से लोहा लिया, कैसे उन्होंने अपने प्राणों की परवाह किए बिना मातृभूमि की रक्षा की। यह कहानी केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि बच्चे में संस्कार जगाने के लिए सुनाई गई है।


अंतिम पंक्तियों का भावार्थ

"सोता है भारत अपनी आँखों में, लोरी का मधुर स्वप्न..."

यह पंक्ति गहन देशभक्ति भावना से ओत-प्रोत है। माँ बच्चे को यह संदेश देती है कि भारत की महानता उसके वीर सपूतों के बलिदान में है। देश केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, बल्कि असंख्य शहीदों के सपनों और त्याग से निर्मित है।

{{KEY: type=concept | title=कहानियों का शैक्षिक महत्व | text=माँ द्वारा सुनाई गई कहानियाँ केवल मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि बच्चों में नैतिक मूल्य, देशभक्ति, साहस और संस्कार जगाती हैं। यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी ज्ञान और संस्कृति के संचरण का माध्यम हैं।}}

बच्चे की नई समझ:

कहानी सुनने के बाद बच्चे के मन में नई चेतना जागती है। वह समझता है कि कहानियाँ केवल काल्पनिक मनोरंजन के लिए नहीं होतीं - वे इतिहास, परंपरा और मूल्यों को सहेजने का माध्यम हैं।


काव्य-सौंदर्य की विशेषताएँ

भाषा की सरलता: कवि ने अत्यंत सरल और सहज भाषा का प्रयोग किया है जो बाल-मन के अनुकूल है। जटिल शब्दों का प्रयोग नहीं किया गया है।

संवाद शैली: पूरी कविता प्रश्नोत्तर शैली में लिखी गई है जो इसे नाटकीय प्रभाव प्रदान करती है। यह शैली पाठक को घटना का साक्षी बना देती है।

भावों की गहराई: सरल शब्दों में गहन भावों की अभिव्यक्ति कवि की विशेषता है। मातृत्व, बाल-मनोविज्ञान और देशभक्ति तीनों ही भाव बड़ी सहजता से व्यक्त हुए हैं।

{{KEY: type=exam | title=परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्न | text=इस कविता से भावार्थ, माँ-बेटे के संवाद का महत्व, कविता की शैली, और कहानी सुनाने की परंपरा से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। काव्य-सौंदर्य से जुड़े प्रश्न भी महत्वपूर्ण हैं।}}

{{ZOOM: title=ऐतिहासिक संदर्भ | text=यह कविता संभवतः किसी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी या वीर योद्धा की घटना पर आधारित हो सकती है। माँ द्वारा सुनाई गई यह कहानी बच्चों में राष्ट्रप्रेम जगाने का माध्यम है।}}


व्याख्या का निष्कर्ष

यह कविता मातृत्व की महानता, बचपन की कोमलता और इतिहास के गौरव का सुंदर समन्वय है। माँ केवल कहानी नहीं सुनाती - वह संस्कार, मूल्य और देशप्रेम का बीज बच्चे के मन में बोती है। कविता यह संदेश देती है कि कहानियाँ हमारी संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने का सशक्त माध्यम हैं।

In this chapter

  • 1.पाठ सारांश, कवि परिचय एवं कठिन शब्दार्थ
  • 2.भावार्थ एवं विस्तृत व्याख्या

Frequently asked questions

What is पाठ सारांश, कवि परिचय एवं कठिन शब्दार्थ?

इन्हें **पद्म श्री**, **साहित्य अकादमी पुरस्कार**, **देव पुरस्कार** और **सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार** जैसे अनेक सम्मानों से सम्मानित किया गया। इनका निधन **27 नवंबर 2002** को हुआ।

What is भावार्थ एवं विस्तृत व्याख्या?

बच्चा अपनी माँ से कहानी सुनाने का आग्रह करता है। यह पंक्ति **बचपन की सहज जिज्ञासा** और **माँ के प्रति विश्वास** को प्रकट करती है। बच्चे के लिए माँ केवल देखभाल करने वाली नहीं, बल्कि **ज्ञान का स्रोत** भी है।

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